2277 एमबीबीएस डॉक्टरों ने दी एचसीएमएस के 447 एमओ के लिए लिखित स्क्रीनिंग परीक्षा
रोहतक। स्वास्थ्य विभाग के हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस में बतौर मेडिकल ऑफिसर काम करने के लिए रविवार को 2277 एमबीबीएस डॉक्टरों ने लिखित स्क्रीनिंग परीक्षा दी है। पंडित बीडी शर्मा यूएचएसआर ने एचसीएमएस की 447 एमओ के रिक्त पदों को भरने के लिए यह परीक्षा ली है। मेरिट में आने वालों का चयन एचसीएमएस के लिए होगा, इससे प्रदेश वासियों की स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं में इजाफा होगा। बता दें कि भर्ती के लिए 2981 आवेदन आए थे।
पंडित बीडीएस यूएचएसआर के फार्मेसी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गजेंद्र ने बताया कि लिखित स्क्रीनिंग परीक्षा रविवार को शांतिपूर्वक संपन्न हो गई। यह परीक्षा कुलपति डॉ. ओपी कालरा के दिशा निर्देशन में हुई है। हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में 447 मेडिकल ऑफिसरों की सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति की जानी है। डॉक्टरों की भर्ती नियमानुसार कराने की जिम्मेदारी सरकार ने संस्थान को दी थी, इसे पूरा कर दिया गया है। जल्द ही तय समय सीमा में इसका परिणाम भी जारी कर दिया जाएगा। डॉ. गजेंद्र सिंह ने बताया कि रविवार को 2277 उम्मीदवारों ने यह परीक्षा दी है और संस्थान के मुख्य सुरक्षा अधिकारी मेजर नीरज शर्मा, एएसओ रोहित व सुपरवाइजर संदीप के नेतृत्व में सभी 11 परीक्षा केंद्रों की चौकसी भर्ती गई। परीक्षा के लिए पीजीआईएमएस में पांच व स्कोलर रोजरी में छह परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
पहले बार ली गई लिखित परीक्षा
स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए एक ओर हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा कर रहा है, जबकि 447 पदों को भरने के लिए सरकार को लिखित स्क्रीनिंग परीक्षा लेनी पड़ी। मेडिकल शिक्षा से जुडे़ एक्सपर्ट बताते हैं कि पहली बार ऐसा हुआ है कि एचसीएमएस में मेडिकल ऑफिसर की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा ली है। इससे पहले साक्षात्कार के माध्यम से ही भर्ती होती थी। बताया जा रहा है कि रूस, चीन व अन्य देशों से भी छात्र अपनी एमबीबीएस की डिग्री ला रहे हैं, इसके चलते एमबीबीएस डिग्री धारकों की संख्या अधिक हो गई है। यही वजह है कि अब मेडिकल ऑफिसर बनने के लिए भी डॉक्टरों को प्रतियोगी परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
परीक्षों केंद्रों पर सख्त रहे सुरक्षा इंतजाम
संस्थान के मुख्य सुरक्षा अधिकारी मेजर नीरज शर्मा के नेतृत्व में 68 सुपरवाइजर, मेल-फीमेल गार्ड परीक्षा केंद्रों पर तैनात रहे। हर सेंटर पर एक सुपरवाइजर, मेल-फीमेल गार्ड की तैनाती थी। परीक्षा केंद्र से 200 मीटर दूर वाहन खडे़ करवाए गए और पुलिस प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखी। महिला परीक्षार्थियों की जांच के लिए स्पेशल केबिन तैयार किए गए थे, किसी को मोबाइल, मैटल का समान व अन्य प्रतिबंधित सामग्री नहीं ले जाने दी गई।